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कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं..|वैष्णवी चारी

 

दूर कहीं किसी परदेस में बस गए हैं,
कामकाजी चक्रव्यूह में धंस गए हैं,
कभी व्हिडीओ काॅल में दिख जाते हैं,
या पुरानी धुंधली यादों में शरमाते हैं,
हां, कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं..

पढाई में अव्वल दर्जे के शेख़ चिली,
परीक्षा में बन जाते थे भिगी बिल्ली,
उन दिनों से आज भी वफ़ा निभाते हैं,
और इस बेचैन दिल को समझाते हैं,
हां, कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं..

वो गोलगप्पे खाने का महा मुकाबला,
या वो इश्क़ का मारा आशिक़ बावला,
कश्तियाँ हैं, बँटी छत्रियां हैं, बरसातें हैं,
जन्मदिन के जश्न और मीठी सौगातें हैं,
हां, कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं..

वो ढाबे का खाना, नुक्कड़ की चाय,
बात बात पर याराना और लडाई,
दूरियों में सिमटे आज हालातें हैं,
भुलाए नहीं भूलते ये वो नाते हैं,
हां, कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं..

वो कँटीन के समोसे, रोज़ की उधारी,
निकम्मे थे पर जानते थे दुनियादारी,
दोस्तों को खोने के साए रोज़ डराते हैं,
जब बीते ज़माने सदा देकर बुलाते हैं,
हां, कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं..

मुलाकात इत्तेफ़ाक़न तो नहीं थी,
किस्से, कहानियां, तक़रारे भी थी,
उम्र कम पडे उतनी तो सिर्फ बातें हैं,
बाकी सब मिलीभगत की वारदातें हैं,
हां, कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं..

यूंही कभी अश्क़ भर आए तो,
या देखने की तलब हो जाए तो,
अतीत के पन्ने फिर सरकाते हैं,
और तस्वीरों से ही काम चलाते हैं,
हां, कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं..

मशगूल सब अपने परिवारों में हैं,
किसे कहां रूचि अब यारों में हैं?
तंत्रज्ञान से दिल के तार जुड़ जाते हैं,
सिर्फ चाहने भर से कहां मिल पाते हैं,
हां, कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं..

यूंही राह चलते कहीं सडक किनारे,
जो दिखे झुंड, याद आते हैं सारे,
अपनी लाचारी पर दुःख मनाते हैं,
चाहे न चाहे, आंखें छलक जाते हैं,
हां, कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं..

वैष्णवी चारी
mi_anamika

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