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तुम्हारे पायल की छनक | Sakshi Agarwal

 

तुम्हारे पायल की छनक
और तुम्हारे कंगन की खनक
मेरे कानों में एक मधुर
धुन सी गूंजती है
जब भी तुम अपने कदम
मेरी ओर बढ़ाती हो ।
मुझे पता था
तुम कभी मुझे उसी अँधेरे
में छोड़ के नहीं जा सकती
जहाँ से तुमने मुझे खींचा था ।
पता नहीं सब क्यों बोलते हैं कि
मैं तुम्हें भूल जाऊँ ,
क्यों बोलते हैं कि
तुम अब हमेशा के लिए जा चुकी हो ।
वो सब शायद पागल है,
जो वो मुझे बोलते हैं मैं हूँ,
जब भी तुम्हारा ज़िक्र करता हूँ ।
मुझे पता है कि तुम्हें पता है यहाँ,
इस जगह जहाँ लोग तुम्हारे मौत की बातें करते हैं,
मुझे जीने का मन नहीं है ।
शायद इसलिए तुम हर रोज़
रात को आती हो और मेरा हाथ
थामकर कहीं ले जाना चाहती हो ।
पर एक बात बोलूँ ?
तुम कुछ बदली बदली सी लगती हो,
तुम्हारे कोमल हाथों का स्पर्श
किसी रस्सी की तंग पकड़ सी लगती है
और तुम्हारे आँखों की उस गहरे समंदर में
मुझे अब मासूमीयत से भरे प्यार की जगह
अब काले घने इरादों की ऊँची लहरें दिखती हैं ।
पर चाहे तुम अपने बदन को
रात के आसमान से ढक दो
या सितारों से चमकाओ,
दिल में मोहब्बत तो हमेशा बेशुमार रहेगी ।
और सुनो मुझे पता है
कि तुम मुझसे थोड़ी रूठी हो
क्यूंकि मैं तुम्हारे साथ उस
दहलीज़ को पार नहीं कर पाता ।
वहां मुझे पहेलियों से भरी
एक अन्धकार दिखती है जिसके पीछे
मानो अनगिनत छुपे हुए नैना
मुझे बिना पलकें झपकाए घूर रहीं है
और उस दहलीज़ के करीब आते ही
एक अजीब सी महक घेर लेती है
जैसे खून और माँस को किसी ने
तड़प के रंगों से रंगा है ।
पर आज मैं जाऊंगा,
तुम्हारे उस हसीन सी मुस्कराहट की
एक झलक के खातिर।
छम छम छम

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“चलें?”
“चलो”
.
-Sakshi Agrawal
Pen._vibes

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