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दयालु रामू | Rohit Tripathi

 

चौराहे पर खड़ी सैकड़ों मजदूरों की भीड़ सिर्फ इस आश में राहे तक रही थी कि सायद अब लाक डॉउन समाप्त होने पर उन्हें कोई काम मिल जाएगा इन मजदूरों में वो मजदूर भी थे जो महामारी के डर से शहर छोड़ गांव लौट आए थे। इन्हीं मजदूरों में एक मजदूर था रामू जो अपनी टूटी चप्पल हाथों में लेकर चौखत पर बैठकर यहीं सोच रहा था कि अगर आज भी मुझे काम नहीं मिला तो फिर पूरे परिवार को भुखा सोना पड़ेगा ।इतने में एक वाहन आकर रुकती है और सभी मजदूर उसे घेर लेते है लेकिन रामू बैठा सोचता रहता है और एक आवाज उसे खुद की ओर खींचती है ।

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ठेकेदार – तुम मजदूर हो ?

रामू – हां मालिक मजदूर है ।

ठेकेदार – एक महीने का काम है घर बनाना है 200rs रोज का।

रामू – मालिक सविंधान में लिखा है कि 8 घंटे काम करने पर 500rs मिलने चाहिए।

ठेकेदार चोंक जाता है फिर घमंड के साथ कहता है
ठेकेदार – चलना है तो बोलो वरना और किसी से पुछु?

रामू – नहीं मालिक हम चलते है ।

रामू और कुछ मजदूर उस ठेकेदार के साथ चले जाते है और शाम को काम ख़तम करके खुशी से घर वापिस आता रहता है तभी उसे एक बच्ची कि रोने की आवाज़ सुनाई देती है और वो रुक जाता है । आस पास नजरे घुमाने के बाद उसे बस स्टैंड पे एक 12साल की छोटी बच्ची नजर आती है
रामू सोच में पड़ जाता है कि ये बच्ची यहां इतनी रात को क्या कर रही है फिर वो उससे पूछने चला जाता है ।

रामू – तुम यहां क्या कर रही हो।

बच्ची – अंकल मै बस स्टैंड पे लुका छिपी खेल रही थी और बस के डिग्गी में छीप गई और यहां चली आई मुझे मेरे मम्मी के पास पहुंचा दीजिए।( रोते स्वर में )

रामू सोचता है – मेरे पास तो 200rs है अगर इस बच्ची को पहुंचाने गया तो ये भी खत्म हो जाएगा और फिर परिवार भूूखा सोएगा
अगर नहीं पहुंचाया तो कहीं इस बच्ची के संग कोई ??नहीं नहीं मै पहुंचा देता हूं
कहा घर है तुम्हारा?

बच्ची – इलाहाबाद

रामू अपने गांव से इलाहाबाद जा रही आखरी बस को पकड़ता है और उस बच्ची के घर पे छोड़ देता है घर पर सिर्फ नौकर मिलते है उसके मम्मी पापा उसकी तलाश में बाहर गए रहते है । तो फिर रामू उस बच्ची को छोड़कर बस स्टैंड वापिस लौट आता है उसके गांव की बस सुबह की रहती है तो वो वहीं सो जाता है ।
कुछ देर बाद एक आवाज रामू की नींद तोड़ देती है और रामू आंखे खोलकर देखता है तो बच्ची अपने माता पिता के साथ उसके सामने खड़ी रहती है ।

बच्ची के पिता जी – भईया हम आपके बहोत आभारी है आप ने हमारी बेटी की जान बचाई है चलिए हमारे घर आराम करिए कुछ खा पी लीजिए फिर जाइए ।

रामू – धन्यवाद साहब लेकिन हम खाना नहीं खा सकते है।

बच्ची के माता पिता हैरान होकर पूछते है ।
क्यों ?

रामू – घर पे दो बच्चे ,बीवी ,अम्मा ,बाबू दो दिन से भुखे है इस बात को नजर अंदाज करके हम कैसे खाना खाले ।

बच्ची के माता पिता रामू की इस अच्छाई को देखकर खुश हो जाते है और अपनी दस बीघा जमीन रामू को खेती करने को दे देते है और फिर रामू का परिवार कभी भूखा नहीं सोता ।
रामू के पास मदद ना करने की कई वजह थी लेकिन वो अपने दयालु स्वभाव को अपनी बुरी परिस्थती में भी नहीं छोड़ा जिसका परिणाम उसका परिवार फिर कभी भूखा नहीं सोया ।

Rohit Tripathi
Insta I’d – rohittripathi276

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