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वो फोन की घंटी |Vardan Jindal

 


दिन भर की भागदौड़ी से थक कर जब रात को सोने से पहले कुछ देर रिलैक्स होने के लिए FM चलाया तभी अचानक से फोन की घंटी बज उठी

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हद है यार, ये रात को किसका फोन आ गया, लोगों को दिन में तो आराम होता नही, अब रात को भी चैन नही लेने देंगे

बड़े ही बेमन से फोन उठाया तो देखते ही चेहरे पर एक मुस्कुराहट फैल गई

चेहरे पर मुस्कुराहट देख मां बोली –
लो.. आ गया इसकी जोरू का फोन

अरे मां, ऐसा कुछ नही है..

“हां हां, पता है, चल कर तू बात “

मैने फोन उठाया और उधर से आवाज आई

हैल्लो, वरदान…

मैं – “चाहत”.. क्या हुआ, सब ठीक तो है, इतनी रात को फोन किया, कुछ गड़बड़ तो नही, देखो ऐसा कुछ है तो मैं अभी आ जाता हूँ….

चाहत – अरे बाबा, सांस तो ले, मैं ठीक हूं और यहां सब ठीक है, कोई परेशानी नही है

मेरी सांस में सांस आई तो मैने पूछा –
तो रात को फोन किया, कोई खास बात?

हां, खुशख़बरी है एक..

खुशख़बरी, कैसी.. कहीं शादी तो ना करने जा रही?  मैने मजाक में पूछा

अरे यार, तुम्हारी इसी बात पर फिदा हूं, तुम मेरे दिल की बात झट से जान जाते हो…

मैं – मतलब?

चाहत – अरे मतलब क्या, वही जो तुमने कहा.. मैं शादी कर रही हूं…

शादी…. मुझे एकदम झटका सा लगा

वो बोली – हां शादी, दरअसल रवि काफी दिनों पहले प्रपोज किया था, मैं टाल रही थी क्योंकि बिना घरवालों की मर्जी मैं कुछ करना नही चाहती थी और आज वो अपने घरवालों के साथ रिश्ता ले कर आ गया, मां पापा को पसंद आ गया और फिर मैने भी हां कर दी,,,, अरे कहां गए… सो गए क्या बात करते?

मैं जो लगभग अचेत हो चुका था, उसके पूछते ही होश में आया
ना, मैं कहां सोया, तुम्हारी ही बातें सुन रहा था..

वो – अच्छा ठीक, अभी सब गए तो मैने सोचा कि ये खबर सबसे पहले तुम्हें ही सुनाऊं

मैं – हां, ये तुम ने बढ़िया किया…

चाहत – अच्छा, अब रात बहुत हो गई, सो जाओ और सुबह होते ही मिलने आ जाना

मैं – हम्म, कोई नही… अच्छा सुनो, तुम खुश तो हो ना ?

चाहत – खुश… अरे बहुत खुश हूं मैं, आज तो पैर जमीन पर नही लग रहे मेरे

मैं – हां, पैर तो मेरे भी जमीन पर नही लग रहे..
चलो, तुम अब सो जाओ… मुझे भी सुबह जल्दी उठना है.. बाय

चाहत – बाय… स्वीट ड्रीमस

मैं धड़ाम से वहीं पर बैठ गया, अपनी जेब टटोली और अंगूठी निकाल के देखने लगा…
हां, यही तो कल उसको देनी थी और अपने प्यार का इजहार करना था…
लेकिन मैं जरा लेट हो गया…
हाय रे मेरी किस्मत… अब क्या कहूं.. किससे कहूं.. कैसे कहूं
इसी उधेड़बुन में लगा सब सोच रहा था की पीछे FM पर 11 बजे के शो का आखिरी गाना चलने लगा –

“मेरी हर खुशी में हो तेरी खुशी… मुहब्बत में ऐसा जरूरी नही”

समाप्त
Vardan Jindal “सुगत”
Insta – @Vardan_Jindal

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