Press "Enter" to skip to content

Posts published in “कलमकार”

Fragrance – सुगंध | Sandeep Tiwari

  फूलों की सुगंध सी, सुगंधित हो तुमकुछ रस्मों और रिवाजों से बंधित हो तुमपलट के लाऊं बागानों से सुगंध तेरे लिए,पत्तियों में कैद फूलों…

वो फोन की घंटी |Vardan Jindal

 दिन भर की भागदौड़ी से थक कर जब रात को सोने से पहले कुछ देर रिलैक्स होने के लिए FM चलाया तभी अचानक से फोन…

माँ का राजदुलारा था | Bhavdeep Saini | 17 August 2017

  लंबा जिसका कद थाघर में उसका ही बड़ा पद थाआवाज़ उसकी भारी थीछवि सबसे न्यारी थी माँ का राजदुलारा थाघर का वो चमकता सितारा…

Meera | Sahiba Tasneem

 जब सीने के अन्दर साँस के दरया डोलते हैं,जब मौसम सर्द हवा में चुप सी घोलते हैं,जब आँसू पलकें रोलते हैं,जब आवाजें अपने बिस्तर सो…

परवाह का दुसरा नाम – पिता | Bhavdeep Saini

 पिता कभी लोरी नहीं सुनातालेकिन सिखाता है अनुशासन पिता कभी कहानी नहीं सुनाता थालेकिन सिखाता है राशन का हिसाब पिता से कभी ममता नहीं जुड़तीलेकिन…

एक छोटी सी ख्वाहिश | Sahiba Tasneem

   मैं सहीबा आपके लिए एक नई कहानी पेश करती हूं। उम्मीद करती हूं आपको ये कहानी पसंद आए ताकि इसकी सफलता से खुश होकर…

मैं चला जाऊंगा | Bharti Trehan

 भारती जी की रचना – मैं चला जाऊंगा  मैं चला जाऊंगा अभी रुक नहीं पाऊँगा फ़िर कभी तुम रुखसती दे देना मुझको और याद करते…