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Posts published in “कविताएं”

Fragrance – सुगंध | Sandeep Tiwari

  फूलों की सुगंध सी, सुगंधित हो तुमकुछ रस्मों और रिवाजों से बंधित हो तुमपलट के लाऊं बागानों से सुगंध तेरे लिए,पत्तियों में कैद फूलों…

“जरा (वृद्धावस्था) सबको सताती है ” | नरेश सिंह नयाल

 जिन्दगी के दिनों का हिसाब है,आकर मिलो हमसे कभी ,सुनाने को बहुत कुछ है ,दर्द बयां क्या करें ,तुम्हें पहले खुशियां बताएंगे,हम वादा करते हैं…

तुम भी ना….|नरेश सिंह नयाल

 मैं पति ही नहींश्रृंगार हूँ तुम्हारे जीवन कामान्यताएं कहती हैंईश्वर ऊपर हैपर धरा पर उसका ही रूपपरमेश्वर हूँ तुम्हारातुम्हारे सिर के बीचों बीचचलती हुई लकीर…

चिट्ठी | नरेश सिंह नयाल

 आज चिट्ठी खुद की लिखी खोल ली,जिनको लिखी थी उन्हीं के लिए बोल दी,उससे पूछा तू क्यों नहीं गई ,भला यहीं कैसे रह गई ,वो…

कुछ दोस्त बहुत याद आते हैं|नरेश सिंह नयाल

 तुम लोग सच मेंबहुत सताते होसब अपने-अपने कामों में होदेखता रहता हूँसुनता रहता हूँतुम सब अपने-अपने क्षेत्र मेंबहुत अच्छा कर रहे होअच्छा लगता हैपर सुन…

माँ का राजदुलारा था | Bhavdeep Saini | 17 August 2017

  लंबा जिसका कद थाघर में उसका ही बड़ा पद थाआवाज़ उसकी भारी थीछवि सबसे न्यारी थी माँ का राजदुलारा थाघर का वो चमकता सितारा…

परवाह का दुसरा नाम – पिता | Bhavdeep Saini

 पिता कभी लोरी नहीं सुनातालेकिन सिखाता है अनुशासन पिता कभी कहानी नहीं सुनाता थालेकिन सिखाता है राशन का हिसाब पिता से कभी ममता नहीं जुड़तीलेकिन…

मैं चला जाऊंगा | Bharti Trehan

 भारती जी की रचना – मैं चला जाऊंगा  मैं चला जाऊंगा अभी रुक नहीं पाऊँगा फ़िर कभी तुम रुखसती दे देना मुझको और याद करते…

पापा | Kiaan

  “पापा” उन्होंने जितनी खुशियां दी हैं हमें हमारी कलम भी नहीं लिख सकती हैं पापा की एक छोटी सी चादर उनके आसुंओ को ढक…

बचपन | Kiaan

  “बचपन” कब बिता वो बचपन मेरा कब हुआ ये नया सवेरा सबसे प्यारा था मां का आँचल और सिर मेरा क्या नींद आती थी…