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Posts published in “Kiaan”

पापा | Kiaan

  “पापा” उन्होंने जितनी खुशियां दी हैं हमें हमारी कलम भी नहीं लिख सकती हैं पापा की एक छोटी सी चादर उनके आसुंओ को ढक…

बचपन | Kiaan

  “बचपन” कब बिता वो बचपन मेरा कब हुआ ये नया सवेरा सबसे प्यारा था मां का आँचल और सिर मेरा क्या नींद आती थी…

मजदूर | Kiaan

 मजदूर ये जो तुझे तेरे महलों पे गुरुर हैं उसकी नींव में झांक कोई मजबूर हैं रोटी के बदले महल खड़ा किया साहब! वो ही…

Bad Dreams | Kiaan (India)  | Post number 011

 प्रतियोगिता बुरा सपना – कलमकार अनुज ने अपनी रचना भेजी है जो कुछ इस प्रकार है  भूतों जैसी बातें आने लगी थी मन में अफवाहों…

माँ | किआन

 माँ एक ऐसा शब्द है जिसे किसी अलंकार की जरूरत नहीं है । यह एक ऐसा शब्द है जिस पर खत्म न होने वाला उपन्यास…